Shankar Bhagwan
शंकर भगवान् (भोलेनाथ) का रूद्राभिषेक
इस ब्रह्माण्ड की समस्त अघोरी, प्रेत, पैशाचिक, कुटिल, शैतानी शक्तियाँ, अतृप्त पितृ शक्तियाँ पूर्ण रूप से शंकर भगवान् (भोलेनाथ) के आधीन हैं। वो ब्रह्माण्ड को संचालन करने वाली तीन महाशक्तियों में से एक हैं। शंकर भगवान् के दो अधिकार क्षेत्र हैं। एक तरफ वह सृष्टि के संहारक हैं तो दूसरी तरफ शिव स्वरूप में सभी दुखों और कष्टों का नाश करने वाले महादेव हैं।
कल्कि नाम से जुड़े हुए 5 रुपये अथवा 5 रुपये और पंचामृत के एक छोटे से अभिषेक को (जो इनके पूरे परिवार का किया जाता है) भोलेनाथ एक रूद्राभिषेक का फल प्रदान करके कल्कि भक्तों की विशेष रक्षा करते हैं।
1) अनुभव में आसुरी शक्तियों के प्रतीक स्वरूप उड़ता हुआ तिलचट्टा, छिपकली, मगरमच्छ, आग उगलता हुआ ड्रेगन, साँप, अजगर, शेर, बंदर या किसी भी तरह का जानवर प्रहार करता हुआ या ऐसे ही खड़ा/बैठा दिखाई पड़ता है तो संकल्प प्रार्थना के साथ किया हुआ एक अथवा पाँच अभिषेक एक ही दिन एक ही बार में हम बारी-बारी हम 5 अभिषेक कर सकते हैं। इन सभी प्रहारों से कल्कि भक्त की रक्षा करता है।
2) स्वप्न अनुभव में हवन और खाना बनाने वाली आग के अलावा दिखाई देने वाली किसी भी तरह की अग्नि विनाश की सूचक होती है। यह आसुरी शक्तियों का तबाह और बर्बाद करने वाला प्रचण्ड प्रहार होता है, पर एक या 5 अभिषेक का संकल्प उन शक्तियों को उनका भाग देकर शांत कर तृप्त और संतुष्ट करता है और उनके हर प्रहार से कल्कि भक्त की रक्षा शर्तिया होती है बशर्ते समय रहते अभिषेक करता है।
3) यदि पितृ शक्तियां बार-बार दिखाई पड़ें या कोई भुगतान मांगती हुई दिखाई पड़े तो नांदीमुख श्राद्ध का संकल्प करके किया हुआ एक अभिषेक ही उनके ऋण से कल्कि भक्त और उसके परिवार को मुक्त कर देता है।
4) अनुभव में यदि अतृप्त पितृ अपनी या औरों की शक्तियाँ एक से अधिक बार दिखाई देती हैं तो पितृ लोक की स्वामिनी देवी स्वधा और भोलेनाथ के नाम से एक सीधा, पानी की बोतल और 5 रुपये का संकल्प उन पितृ शक्तियों को तृप्त और संतुष्ट करने के लिये कल्कि भक्त और उसके परिवार की रक्षा करता है।
5) शनिवार को गाय के कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर कल्कि हवन महामंत्र की एक माला का शिवलिंग पर एक अभिषेक (108 बार) शनि, राहु और केतु ग्रह के दोष को शांत करता है। यह तब तक करते रहना चाहिए जब तक कोई सही अनुभव न आ जाए।
6) सोमवार को गाय के कच्चे दूध में काला तिल मिलाकर कल्कि हवन महामंत्र की एक माला का शिवलिंग पर एक अभिषेक मार्केश योग से कल्कि भक्त के प्राणों की रक्षा करता है। इसके साथ ही सोमवार को महामृत्युंजय मंत्र की तीन माला का हवन किया जाता है। कुछ हफ्तों में मार्केंश की दशा कट जाती है और अनुभव में कल्कि जी इसका संकत भी देते हैं।
7) यदि जीवन में बहुत ज्यादा परेशानी आ जाए तो तीन केलों के साथ पंचामृत का अभिषेक शीघ्र ही उन परेशानियों से बाहर निकलने का रास्ता देता है।
8) यदि कुण्डली में बुद्ध ग्रह खराब हैं और उसके कारण परेशानियाँ आ रही हैं, पति-पत्नी में बेवजह कलह है तो 11 भिण्डी (ऊपर से टोपी काटकर चढ़ाएं) के साथ किया हुआ अभिषेक इस ग्रह के दोष को धीरे-धीरे शांत कर देता है।
पंचामृत तैयार करने की विधि: यह कलियुग है (मनुष्य गायों को ही काटकर खा रहे हैं, श्रेष्ठ तो गाय का दूध ही है, नहीं मिले तो जो उपलब्ध हो उपचार न रोकें) गाय का कच्चा दूध, शहद, चीनी, गंगाजल, घी दही से पंचामृत बनाया जाता है।
प्रार्थना: 1) हे भोलेनाथ कलियुग की जो भी अघोरी, तांत्रिक, प्रेत, पैशाचिक और अतृप्त पितृ शक्तियाँ आपके गणों के साथ मिल कर मुझ पर प्रहार करके मुझे तबाह और बर्बाद करना चाहती हैं (अनुभव का विवरण), अभिषेक के संकल्प के द्वारा उन्हें उनका भाग देकर तृप्त और संतुष्ट करें, उनके लोकों में उन्हें वापिस भेजें, उनके हर प्रहार से मेरी, मेरे परिवार और घर और व्यापार की रक्षा करें, मुझे सुख, सौभाग्य, आयु और आरोग्यता का दान दें। मुझे सुखी भाव में वैभवतापूर्वक जीवन जीते हुए कल्कि जी के प्राकट्य का विशिष्ट कार्य करना है।
2) नांदीमुख श्राद्ध- हे भोलेनाथ, मैं नांदीमुख श्राद्ध का संकल्प करके यह अभिषेक आपको अर्पण कर रहा हूँ, इसे स्वीकार करें। सम्बन्धित अतृप्त, पितृ शक्ति को उसका भाग देकर संतुष्ट करें। और मुझसे और मेरे परिवार से जो भी चाहिये, इस संकल्प के द्वारा उसे प्रदान करें (मेरे घर और परिवार में उसका प्रवेश बंद करें) मुझे स्वस्थ शरीर, सुखी भाव से वैभवतापूर्वक अपने परिवार के लोगों के साथ जीते हुए कल्कि जी के प्राकट्य का अति विशिष्ट कार्य करना है।