Brahmani Santan
ब्रह्माणी संतान प्राप्ति के लिए
गर्भ में पल रहा जीव अत्यंत ही असुरक्षित होता है। ब्रह्माण्ड की अनेक आसुरी शक्तियां ऐसी होती हैं जो इन भ्रूणों के भक्षण के लिए ललायित रहती हैं। उन्हें मौका चाहिए, और यह मौका उन्हें जीव के पूर्व जन्मों के पापों के भुगतान के रूप में मिलता है। गर्भस्त शिशु की रक्षा के लिए ब्रह्मा जी ने ब्रह्मणी नाम की एक तीव्र शक्ति को नियुक्त किया है जो सप्तमात्काओं में से एक है। गर्भवती माता यदि संकल्प और पूजा द्वारा ब्रह्मणी जी से अपने शिशु की रक्षा के लिए प्रार्थना करती है तो ब्रह्मणी जी आसुरी शक्तियों के हर प्रहार से उस शिशु की रक्षा कर उसे आयु-आरोग्यता प्रदान करती हैं। ब्रह्मणी जी सुनहरी आभायुक्त चार मुख और चार हाथ वाली देवी हैं जो लाल कमल पर विराजमान रहती हैं परन्तु उनकी सवारी सरस्वती माँ की तरह हंस की है। उन्हें पलाश के पेड़ के नीचे बैठना बहुत अच्छा लगता है। कल्कि नाम के साथ जुड़ने पर ब्रह्मणी जी का 20 रुपये की दक्षिणा और प्रसाद का संकल्प उनके साथ-साथ सप्तमात्काओं की शक्तियों को जागृत कर देता है और ये सातों शक्तियां मिलकर उस गर्भस्त शिशु को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं।
प्रार्थना : हे ब्रह्मणी माँ मैं 20 रुपये आपकी दक्षिणा और प्रसाद के निमित्त संकल्प करके अपने होने वाले बच्चे की सुरक्षा के लिये आपको अर्पण कर रही हूँ इसे स्वीकार करें। सप्तमात्काओं की शक्तियों से बना अति विशिष्ट सुरक्षा कवच इसे प्रदान करें जो आसुरी शक्तियों के हर प्रहार से इसकी रक्षा करें। मुझे स्वस्थ शरीर और सुखी भाव से वैभवता पूर्वक अपने इस बच्चे के साथ रहते हुए कल्कि जी के प्राकट्य का अति विशिष्ट कार्य करना है।
नोट:
अधिकांश लोग यही जानते हैं कि ब्रह्मणी जी ब्रह्मा जी की पत्नी है, पर ऐसा नहीं है। वो ब्रह्मा जी की शक्ति हैं, पत्नी नहीं।
2. ब्रह्मा जी Formation करते हैं, ब्रह्मणी जी उस Formation की रक्षा करती हैं। जब तक Formation नहीं हो, ब्रह्मा जी का 20 रुपये दक्षिणा और प्रसाद का संकल्प करना चाहिए, पर Formation होने के बाद ब्रह्मणी जी का 20 रुपये का संकल्प करना चाहिए।
3. भगवान् शिव के हाथों में अंधकासुर नामक अत्यंत शक्तिशाली असुर के वध के समय ब्रह्माण्ड की सात शक्तियों ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वरी, कुमारी वाराही, इन्द्राणी और चामुण्डा को प्रकट कर भगवान् शिव की मदद के लिए भेजा था जो कालांतर में सप्तमात्काओं के नाम से पूजित हुई। ये हमेशा साथ में रहती हैं। तमिलनाडु के रमनाथपुरम, और राजस्थान के जयपुर में वैतरणी नदी के दशाश्वरमेधघाट के किनारे पर सप्तमात्काओं का मंदिर बना हुआ है।
4. हिन्दु परिवार में गर्भवती माताएं अपने बच्चों की रक्षा की कामना हेतु इन शक्तियों की ही बेमाता, गुप्तामाता इत्यादि के रूप में पूजा करती हैं।