Hanuman Ji

🧘 Category: Daan 📅 20/08/15

हनुमान जी

 

व्‍यापारिक और घरेलु परेशानियां ज्‍यादे होने पर शनिवार को शाम को हनुमान जी के सामने बैठ कर मंदिर में यह पूजा की जाती है।

सामग्री- लाल कपड़ा, हरा आसन, 11 आटे के दीपक, सूखा गोला, बत्‍ती, काली उड़द, 11 सिक्‍के, सरसों का तेल, मिट्टी का दीपक आरती के लिए, माला जपने के लिए, गोमुखी।

विधि- मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति के आगे लाल कपड़ा बिछाकर 11 दीवों में गोल बत्‍ती लगाकर उसमें सरसों का तेल और काली उड़द की दाल डालें बत्‍ती को ऐसे चिपकाएं कि वह हिले नहीं। हर दीवे में 4 या 5 दाने उड़द की दाल के डालें। दीवा जलाकर 11 सिक्‍के हाथ में लेकर संकल्‍प करें- हे गुरूजी महाराज, आप कल्कि मंडल के आदि गुरू हैं मैं आप से रास्‍ता चाहती हूं मैं यह तांत्रिक पूजा “समय बोलना है” शुरू कर रही हूँ जिसमें मैने आटे के 11 दीपक जलाए हैं सरसों का तेल और काली उड़द डालकर। हक अनीह निष्‍कलंक गौरण्‍डा दुष्‍टहा नाशनं पापहा की एक माला का जाप गुरू हनुमान जी की आरती, कल्कि जी की आरती करके यह संकल्‍प ले रही हूँ इसे स्‍वीकार करें। कलियुग की उन सारी दुराचारी, अघोरी, तांत्रिक, काली, मलेच्‍छा आसुरी शक्तियों का दमन करें। फिर अपनी परेशानी बताएं। हमारी परेशानियों से हमें बाहर निकालिए हमारे व्‍यापार और परिवार की रक्षा करें। मेरे परिवार को अपना सुरक्षा कवच प्रदान करें मुझे सुखी भाव से वैभवतापूर्वक कल्कि जी के प्राकट्य का प्रचार करना है। आरती मिट्टी के दीवा से करनी है। दिवा आसन पर नहीं रखें। आरती के बाद सारी प्रार्थना दोबारा बोलनी है पूजा का समय समाप्‍त वाला भी बोलना है। आसन अपना साथ में ले आएं लाल कपड़े पर जो दीवे हैं वो वहीं छोड़ दें। “समय बोलना है” शुरू कर रही हूँ जिसमें मैने आटे के 11 गौरण्‍डा दुष्‍टहा नाशनं पापहा की एक माला का जाप, गुरू हनुमान जी की आरती कल्कि जी की आरती करके यह संकल्‍प ले रही हूँ इसे स्‍वीकार करें। कलियुग की उन सारी दुराचारी, अघोरी, तांत्रिक, काली मलेच्‍छा आसुरी शक्तियों का दमन करें। फिर अपनी परेशानी बताएं। हमारी परेशानियां हमें बाहर निकालिए हमारे व्‍यापार और परिवार की रक्षा करें। मेरे परिवार को अपना सुरक्षा कवच प्रदान करें मुझे सुखी भाव से वैभवतापूर्वक कल्कि जी के प्राकट्य का प्रचार करना है। आरती मिट्टी के दीवे से करती है। दीवा आसन पर नहीं रखें। आरती के बाद सारी प्रार्थना दोबारा बोलनी है पूजा का समय समाप्‍त वाला भी बोलना है। आसन अपना साथ में ले आएं लाल कपड़े पर जो दीवे हैं वो वहीं छोड़ दें। 

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