Rogo Se Raksha Hetu
रोग रक्षक मंत्र
इस जगत के सबसे बड़े वैद्य भगवान श्री धन्वंतरी (जो नारायण के 24 अवतारों में से एक हैं) समुद्र मंथन के समय अमृत कलश और दिव्य औषधियों के साथ प्रगट हुए थे। इस कलियुग में नारायण के महाअवतार भगवान श्री कल्कि धन्वंतरी जी की समस्त शक्तियों को धारण कर जगत में फैली हुई कलियुग की विषैली शक्तियों के दुष्प्रभाव से उत्पन्न समस्त साध्य और असाध्य रोगों से अपने भक्तों की रक्षा कर उन्हें आरोग्यता प्रदान करते हैं। नीचे लिखे मंत्रों को जाप/हवन सभी आधि-व्याधि और रोगों से भक्तों की रक्षा करता है।
ॐ कल्कि जूं जूं ज्वर हरणाय स्वाहा — ज्वर आदि रोग व्याधियों को दूर करने वाले
ॐ कल्कि जगद् वैद्यनाथाय स्वाहा — संसार के वैद्यों के स्वामी
ॐ कल्कि कलि रोगहराय स्वाहा — कलिकालरूपी रोग को दूर करने वाले
ॐ कल्कि वैद्यानां वैद्याय स्वाहा — वैद्यों के भी वैद्य
ॐ कल्कि औषधि राजाय स्वाहा — औषधियों में गुण डालने वाले
ॐ कल्कि महौषधि धात्रे स्वाहा — महौषधियों के स्वामी
ॐ कल्कि आधि-व्याधि नाशिने स्वाहा — मन के शरीर के रोग नष्ट करने वाले
ॐ कल्कि समुद्र धन्वंतरये स्वाहा — समुद्र की अथाह गहराइयों में धन्वंतरी की तरह वास करने वाले
नोट:- जिस तरह समुद्र की अथाह गहराइयों में वास करने वाले धन्वंतरी जी मंथन के पश्चात् ही प्रगट हुए थे, उसी तरह भक्त के हृदय में निवास करने वाले भगवान श्री कल्कि भक्ति, सत्संग और संकीर्तन के द्वारा ही भक्त के मानस में प्रगट होकर उसका मार्ग दर्शन करते हैं।