Sidh Samput Mantra

🧘 Category: Jaap 📅 04/12/14

 

 

 

 

 

सिद्ध सम्‍पुट मन्‍त्र

काली ध्‍यान

शवारूढ़म्‍महाभीमां घोरदंष्‍ट्रां हसन्‍मुखीम।
चतुर्भुजाचण्‍डमुण्‍डवराभयकरां शिवाम् ।।1।।

मुण्‍डमालाधरान्‍देवीं ललज्जिह्वान्दिगम्‍बराम्।
एवं सन्चिन्‍तयेत्‍कालीं श्‍मशानालयवासिनीम। ।।2।।

शिव ध्‍यान

ध्‍यायेन्नित्‍यम्‍महेशं रजतगिरिनिभन्‍चारूचन्‍द्रावतंसम्।
 रत्‍नाकल्‍पोज्‍जवलांगम्‍परशुमृगवरभीतिहस्‍तम्‍प्रसन्‍नम्।।

पद्मासीनं समन्‍तात्‍स्‍तुतममरगणैव्‍वर्याघ्रकृ तिंव्‍वसानम।।
व्विश्‍वाद्यं व्विश्‍वबीजन्निखिलभयहरवक्‍त्रत्रिनेत्रम्।।

गणेश ध्‍यान

हस्‍तीन्‍द्राननमिन्‍दुचूडमरुगच्‍छायन्त्रिनेत्रं रसा।
श्लिष्‍टम्प्रियया सपद्मकरया स्‍वांकस्‍थया सन्‍ततम्।

                   बीजापूरगदाधनुस्त्रिशिखियुक्‍चक्राब्‍जपाशोत्‍पल।
                   ड्कंजाभै: स्‍वविषाणरत्‍नकलशौ हस्‍तेर्व्‍वहन्‍तम्‍भजे।।

गणेश यन्‍त्रोद्धार — गणेश यन्‍त्र बनाकर उसका पूजन करने से ही गणेश यन्‍त्रोद्धार हो जाता है।
गणेश मन्‍त्रोद्धार —     इस मन्‍त्र को 28 बार स्‍मरण करने ही ही मन्‍त्रोद्धार हो जाता है।

सूर्य ध्‍यान

भास्‍वद्रत्‍नाढ्यमौलि: स्‍फुरदधररुचारञ्जि‍तश्‍चारुकेशी।
भास्‍वान्‍योदिव्‍यतेजा करकमलयुत: स्‍वर्ण्‍णवर्ण्‍ण प्रभाभि:।

विश्‍वाकाशावकाशो गृहगणसहितो भाति यश्‍चोदयाद्रौ।
सर्व्‍वानन्‍दप्रदाता हरिहरनमित पातु मां व्विश्‍वचक्षु:।।

सूर्य यन्‍त्रोद्धार — सर्वप्रथम सूर्य यंत्र बनाकर प्रणव, माया बीज आदि से पूजन करना ही यंत्रोद्धार माना गया है।

विष्‍णु ध्‍यान

शान्‍ताकारम्‍भुजगशयनम्‍पद्यनाभं सुरेशम्।
विश्‍वाधारंगगनसदृशम्‍मेघवर्ण शुभांगम्।

लक्ष्‍मीकान्‍तंकमलनयनं योगिभिर्ष्‍यानगम्‍यम्।
वन्‍दे विष्‍णुम्‍भवभयहारं सर्व्‍वलोकैकनाथम्।।‍

विष्‍णु यन्‍त्रोद्धार — विष्‍णु यंत्र बनाकर उसकी षोडशोपचार पूजा करने से विष्‍णु यंत्रोद्धार हो जाता है।
विष्‍णु मंत्रोद्धार —  विष्‍णु मन्‍त्र का 108 बार उच्‍चारण करने से मंत्रोद्धार हो जाता है।

 

एकत्रिंशवक्षर वक्र तुण्‍ड ध्‍यान

चतुर्भुजं रक्‍ततनुं त्रिनेत्रं

पाशांकुशो मोदकपात्रदंतौ।

करैर्दधानं सरसीरुहस्‍य

मुन्‍मत्‍त मुच्छिष्‍ट गणेश मीडे।

त्र्यम्‍बक मन्‍त्र
यह मन्‍त्र कालभक्षी माना गया है। जिसकी आयु कम हो उसे इस मन्‍त्र का विधान अवश्‍य ही करना चाहिए।

विनियोग
अस्‍य त्र्यम्‍बक  मन्‍त्रस्‍य वसिष्‍ठ ऋषि:, अनुष्‍टुप् छन्‍द:, त्र्यम्‍बक पार्वती पतिर्देवता, त्र्यं बीजम्, बं शक्ति:, कं कीलकम्, सर्वेष्‍ट सिद्धयर्थे जपे विनियोग:।

ध्‍यान

हस्‍ताभ्‍यां कलशदृयामृतरसैराप्‍लावयंतं शिरो।
द्वाभ्‍यां तौ दधतं मृगाक्षवलये द्वाभयां वहंतं परम्।।

अंकन्‍यस्‍त करद्वयामृतघटं कैलासकांतं शिवम्।
स्‍वच्‍छांभोजगतं नवेन्‍दु मुकुटं देवं त्रिनेत्रं भजे।।

त्र्यम्‍बक मन्‍त्र                 

ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्‍धनान्‍मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्।।

फल — इस मन्‍त्र का एक लाख जप करने से व्‍यक्ति समस्‍त इन्द्रियों को जीत लेता है। इस मन्‍त्र को सिद्ध करने के लिये शिव पर बिल्‍व, पलाश आदि चढ़ाने चाहिए। मन्‍त्र सिद्ध होने पर वह शत्रुओं पर पूर्ण विजय प्राप्‍त करता है और उसकी इच्‍छा मृत्‍यु होती है।

रुद्र मन्‍त्र
यह मन्‍त्र शिव को प्रसन्‍न करने वाला है तथा इस मन्‍त्र को सिद्ध करने पर शंकर स्‍वयं साक्षात् दर्शन देते हैं।

विनियोग
अस्‍य श्री रुद्र मन्‍त्रस्‍य बौधायन ऋषि: पंकित्‍श्‍छन्‍द:, रुद्रो देवता, ममाभीष्‍ट सिद्धयर्थे जपे विनयोग:।।

ध्‍यान

कैलासाचल सन्निभं त्रिनयनं पंचास्‍यमंबायुतम्।
नीलग्रीव महीश भूषण धरं व्‍याघ्रत्‍वचा प्रावृतम।।

                   अक्ष्‍ज्ञस्रग्‍वर कुंडिका भयकरं चांद्रीं कलां बिभ्रतं।
                   गंगांभो विलसज्‍जटं दशभुजं वंदे महेशं परम्।।

 

रुद्र मन्‍त्र
ॐ नमो भगवते रुद्राय।

फल — एक लाख मन्‍त्र जप करने से यह मन्‍त्र सिद्ध होता है। यह मन्‍त्र गृहस्‍थ जीवन की समस्‍त इच्‍छाओं की पूर्ति करने में सहायक होता है तथा जीवन में वह धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष सभी का पूरा लाभ प्राप्त करने में समर्थ हो पाता है।

लक्ष्‍मीनारायण मन्‍त्र
ॐ ह्त्रीं ह्त्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्‍मीवासुदेवाय नम:।

फल — दस लाख मंत्र जपने से यह मंत्र सिद्ध होता है। इस मंत्र को चांदी के पत्र पर अंकित कर नित्‍य उसकी पूजा करने से जीवन में सभी प्रकार का सुख एवं वैभव प्राप्‍त होता है।

वाहार मन्‍त्र
ॐ नमो भगवते वाराह रूपाय भुर्भुव: स्‍व: स्‍यात्‍पते भूपतित्‍वं देह्यते ददापय स्‍वाहा।

सूर्य मन्‍त्र
यह मन्‍त्र सूर्य को प्रसन्‍न करने के लिये तथा जीवन में अक्षय कीर्ति और समस्‍त कार्यों में पूर्ण सफलता प्राप्‍त करने के लिये अत्‍यन्‍त अनुकूल है।

विनियोग
अस्‍य सूर्य मंत्रस्‍य भृगु ऋषि:, गायत्री छन्‍द:, दिवाकरो देवता, ह्त्रीं बीजम्, श्रीं शक्ति:, दृष्‍टादृष्‍ट फल सिद्धये जपे विनियोग:।

ध्‍यान

रक्‍ताब्‍ज युग्‍मा भय दान हस्‍तं।
         केयूर हारांगद कुंडलाढ्यम्।

माणिक्‍य मौलिं दिननाथ मीडे।
        बंधूक कांति विलसत्त्रिनेत्रम्।

 

सूर्य मन्‍त्र
ॐ ह्त्रीं घृणि: सूर्य्य आदित्‍य श्रीं।

फल — इस मंत्र का दस हजार जप करने से यह मंत्र सिद्ध हो जाता है। इस मंत्र में पुत्र संतान देने की अद्भुत क्षमता है। साथ ही साथ यह नेत्रों की ज्‍योति बढ़ाने शरीर को कांतिमय बनाये रखने तथा वाक्सिद्धि के लिये अपूर्व है।

धन, धान्‍य, पशु, क्षेत्र, पुत्र, मित्र, पत्‍नी, तेज, वीर्य, यश, कांति, विद्या, वैभव, भाग्‍य आदि बढ़ाने में भी यह मंत्र पूर्णत: सहायक माना गया है।

प्रत्‍येक गृहस्‍थ को इस मंत्र की एक माला नित्‍य फेरनी चाहिए और साथ ही साथ प्रात: काल सूर्य को अर्ध्‍य देने से वह दिन सभी दृष्टियों से अनुकूल एवं लाभदायक रहता है।

 

हनुमान अष्‍टदशाक्षर मन्‍त्र
ॐ नमो भगवते आंजनेयाय महाबलाय स्‍वाहा।

द्वादशाक्षर हनुमान मन्‍त्र
हं हनुमते रुद्रात्‍मकाय हुं फट्।

चतुर्दशाक्षर हनुमान मन्‍त्र
ॐ नमो हरि मर्कट मर्कटाय स्‍वाहा।

फल — यह अनुभवसिद्ध और गोपनीय मंत्र है। इसका विधान इस प्रकार है कि साधक को प्रात:काल ब्राह्म मुहूर्त में उठकर आम के पत्‍ते पर गुलाल छिड़ककर अनार की कलम से एक लाख मंत्र लिखे तो उसका कार्य निश्‍चय ही सिद्ध होता है।

आपत्तिउद्धारक बटुक मन्‍त्र
ॐ ह्त्रीं वटुकाय आपदुद्धरणाय कुरु कुरु वटुकाय ह्त्रींम्।

फल — यह अनुष्‍ठान किसी भी महीने के शुक्‍ल पक्ष की द्वितीया से प्रारम्‍भ करना चाहिए और नित्‍य दस हजार मंत्र जप करने चाहिए। कुल सवा लाख मंत्र जप करने से यह मंत्र सिद्ध होता है।

यह मंत्र विद्या, बुद्धि, धन-धान्‍य, पुत्र, पौत्र, देने में सहायक है तथा सभी कार्यों के लिए अनुकूल है।
अनुष्‍ठान में एक समय भोजन करना चाहिए और पूर्णत: ब्रह्मचर्य व्रत पालन करना चाहिए।

 

नर्वाण मन्‍त्र
यह देवी का प्रसिद्ध मंत्र है और बिना इस मंत्र के देवी पाठ का देवी से संबंधित कोई भी अनुष्‍ठान सफल एवं सिद्ध नहीं हो पाता।

विनियोग
ॐ अस्‍य श्री नवार्ण मंत्रस्‍य ब्रह्मा विष्‍णु महेश्‍वरा ऋषय: गायत्र्युष्णिगनुष्‍टु भश्‍छंदांसि, महाकाली महालक्ष्‍मी महासरस्‍वत्‍य: देवता:, नंदजा शाकुंभरी भीमा: शक्‍तय:, रक्‍तदंतिका दुर्गा भ्रामयो बीजानि, ह्त्रीं कीलकम्, अग्निवायु सूर्यास्‍तत्‍वानि, कार्य निर्देश जपे विनियोग:।

नवार्ण मन्‍त्र
ॐ ऐं ह्त्रीं क्‍लीं चामुण्‍डाये विच्‍चे।

वाग्‍देवी मन्‍त्र
ॐ ह्त्रीं ऐं ह्त्रीं ॐ सरस्‍वत्‍यै नम:।

बगलामुखी मन्‍त्र
यह मन्‍त्र शत्रुनाश एवं शत्रुओं पर विजय प्राप्‍त करने के लिए श्रेष्‍ठतम तांत्रिक मन्‍त्र माना गया है।

विनियोग
ॐ अस्‍य श्री बगलामुखी मंत्रस्‍य, नारद ऋषि: बृह‍ती छन्‍द:, बगलामुखी देवता, ह्त्रीं बीजम्, स्‍वाहा शक्ति:, ममाखिलावाप्‍तये जपे विनियोग:।

ध्‍यान

सौवर्णासन संस्थितां त्रिनयनां पीतांशुकोल्‍लासिनीम्।
हेमाभांगरुचिं शशांकमुकुटां सर्च्‍चपक स्रग्युताम्।

                   हस्‍तै र्मुद्गरपाशवज्र रशना: संबिभ्रतीं भूषणै:।
                   व्‍याप्‍तांगीं बगलामुखीं त्रिजगतां संस्‍तंभिनीं चिंतयेत्।।

 

बगलामुखी मन्‍त्र
ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्‍टानां वाचं मुखं पदं स्‍तंभय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्त्रीं ॐ स्‍वाहा।

फल — एक लाख मन्‍त्र जपने से यह सिद्ध होता है। शत्रुओं पर विजय तथा जीवन में शत्रुओं पर अक्षय सफलता प्राप्‍त करने के लिये यह साधना सर्वोत्‍कृष्‍ट है।

लक्ष्‍मी बीज मन्‍त्र
यह मंत्र लक्ष्‍मी-प्राप्ति के लिए विशेष अनुकूल तथा प्रभावपूर्ण है।

विनियोग
ॐ अस्‍य श्री लक्ष्‍मीबीज मंत्रस्‍य भृगु ऋषि: निवृच्‍छंद: श्री लक्ष्‍मी र्देवता, मम धनाप्‍तये जपे विनियोग:।

ध्‍यान

ॐ कांत्‍या कांचन सन्निभां हिमगिरी प्रख्‍यैश्‍चतुर्भिर्गजै:।
हस्‍तोत्क्षिप्‍त हिरण्‍मयामृतघटैरासिच्‍यमानाश्रियम्।

                   बिभ्राणां वरमब्‍ज युग्‍ममभयं हस्‍तै: क्रिरीटोज्‍जवलाम्।
                   क्षौमा बद्ध नितम्‍बबिम्‍ब लसितां बंदेऽरविन्‍दस्थिताम्।

 

लक्ष्‍मी बीज मन्‍त्र
‘श्रीं’।

फल — इस मन्‍त्र का निरन्‍तर मानस जप चलता रहना चाहिए। इससे जीवन में पूर्ण आर्थिक उन्‍नति बनी रहती है।

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